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Vishnu Bhagwan Mandir
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इस मन्दिर में भगवान विष्णु की प्रतिमा जो एकमेव कसौटी के पत्थर निर्मित 4 फूट 6 ईंच की है इस प्रतिमा में भगवान विष्णु के दषावतारों का बड़ा सुन्दर, सुक्ष्म एवं कलात्मक उर्त्कीण देखने को मिलता है। इस मूर्ति का मूर्तिकार प्रतिमा निर्माण की शास्त्रोक्त विधि से पूर्ण परिचत प्रतीत होता है क्योकि प्रतिमा में शास्त्रों का पूरा अनुसरण किया गया है।
प्रतिमा के मस्तक पर किरीट है, छाती पर माला और यज्ञोपवीत है। प्रभामण्डल पर नवग्रहो के उमरे हुए उर्त्कीण चित्र है मूर्ति के साथ सटी हुई पुरूश मूर्तिया पिंगल (अग्नि) और दण्डनायक (सकन्द) की है ।
यह मूर्ति 1922 में चौधरी उदमी राम, कुम्भकार को हांसी के किले पर मिट्टी खोदते समय मिली थी। इसके पश्चात् वह धनी से धनी होते गये।
तत्कालिन ब्रिटिश सरकार ने इस प्रतिमा को पंजाब म्युजियम, लाहौर या ब्रिटिश म्युजियम लंदन में रखने का प्रयत्न किया परन्तु उस समय के तहसीलदार तथा हांसी के नागरिकों द्वारा विरोध किये जाने पर प्रतिमा को हांसी में रहने दिया । प्रारम्भ में प्रतिमा को घराईयों वाली गली के सामने पंडित मामचन्दजी के मन्दिर में रखा गया। जहां हजारों की संख्या में लोगो ने प्रतिमा के दर्शन किये ।
सन् 1933 में यह प्रतिमा चोपटा बाजार के वर्तमान मन्दिर में स्थापित की गई। इस मन्दिर के निर्माण के लिए हिसार के ब्राह्मणों ने दान में दी थी। मन्दिर में लगे शिलालेख के अनुसार मन्दिर भवन का निर्माण ला. जीतूमल मित्तल चानोतिया ने करवाया तथा मन्दिर का खर्च चलाने के लिए एक दुकान भी दान में दी थी । मन्दिर निर्माण में इस बात का विषेश ध्यान रखा गया कि सड़क पर चलता हुआ व्यक्ति भी भगवान् के दर्षन कर सके। |
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